मंजिल न दे चराग न दे होसला तो दे,
तिनके के का ही सही तू मगर आसरा तो दे.
मैंने ये कब कहा के मेरे हक मी हो जवाब,
लेकिन खामोश क्यों हे तूं कोई फैसला तो दे.
बरसों में तेरे नाम पर खाता रह फरेब,
मेरे खुदा कहाँ है तूं अपना पता तो दे.
बेशक मेरे नसीब पर रख अपना इख्तियार,
लेकिन मेरे नसीब मैं क्या है बता तो दे.
-Rana Sahri
Ek baho t hi acchi kavita. hindi litearture magazine rivew ka liyai ayi http://katha-chakra.blogspot.com
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